सभी साथ-साथ चले, समवेत स्वर में बोलें एवं सबके मन एक समान हो''. यह आर्षवाणी एकता-सूत्र में बँधकर सामंजस्यपूर्वक समूह-जीवन-यापन के दिव्य संदेश को प्रसारित करती है । वर्तमान परिदृश्य में शहरी जीवन की विषमताओं एवं समस्याओं से ग्रस्त व्यक्ति यदि एक बृहत्-समुदाय का अंग बन जाय तो उसका संबल प्राप्तकर उसका भौतिक एवं सामाजिक जीवन सुगम और उल्लासमय बन सकता है । एक वर्ग के लोग प्रकीर्ण न होकर संगठनबद्घ हो एक फलक पर आ जाँय तो उस वर्ग के लोग की आत्मिक पारिवारिक एवं सामाजिक प्रगति तो होती ही है. समग्र समाज पर इसका सकारात्मक प्रभाव दिखाई पड़ता है । इन्हीं मूल प्रेरणाओ से ऊर्जा प्राप्त कर "उत्तर भारतीय ब्रह्म समाज" की प्रतिष्ठापना की गयी है । हम ब्राह्मण ही हिन्दू समाज के पथ प्रदर्शक रहे हैं । सनातन धर्म की रक्षा समाज में फैली कुरीतियाँ-जैसे दहेज प्रथा, सामाजिक स्तरभेद अभिशाप बन गई है, हमारी युवा पीढी दिग्भ्रमित हो रही है । भ्रूण-हत्या मानव समाज में एक भयंकर नासूर बन गई है । युवा पीढ़ी आहार,आचार,विचार,संस्कार से दूर होती जा रही है । हमारा प्रयास है कि हम समाज के सभी वर्गो को साथ लेकर समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने में एकजुट होकर सहभागी बनें ।
व्यक्ति ही किसी समाज का शक्ति-स्रोत हैं, तद्वत उस समाज से शक्ति ग्रहण कर लोकजीवन निष्कंटक होकर पुष्पित एवं पल्लवित होता रहता है । मैं मनसा वाचा कर्मणा ब्राह्मण समाज के उत्तरोत्तर प्रगति के लिए प्रतिबद्घ हूँ एवं सभी ब्राह्मण बंधुओ से इस संगठन से जुड़कर इसे सशक्त बनाने का आवाहन करता हूँ । जीवन प्रगति का पर्याय है एवं सकारात्मक परिवर्तन सदैव श्लाध्य होते हैं । इस संदर्भ में आये हुए सभी परामर्श सहर्ष स्वीकार्य रहेंगे ।
मैं ब्राह्मण वर्ग के साथ-साथ समग्र समाज की मंगल कामना करता हूँ ।
उद्घवजी पाण्डेय (अध्यक्ष एवं मे. ट्रस्टी)
उत्तर भारतीय ब्रह्म समाज अहमदाबाद
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